आसनसोल उत्तर में जमीन विवाद का सच, विधायक के सामने बनी ‘मनगढ़ंत कहानी’ का बड़ा पर्दाफाश!

आसनसोल (आसनसोल समाचार): आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जमीन विवाद के मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। जिस जमीन को लेकर इलाके के कुछ लोगों द्वारा तरह-तरह की मनगढ़ंत कहानियां गढ़कर विधायक के सामने पेश किया गया था, जमीनी स्तर पर पड़ताल करने के बाद उसकी असलियत कुछ और ही निकली है। तथ्यों और सरकारी दस्तावेजों की गहन जांच के बाद यह साफ हो चुका है कि जमीन के वास्तविक स्वरूप (पुखुर/दंगा) और उसके कानूनी धर्मांतरण (Conversion) को लेकर फैलाई जा रही बातें पूरी तरह भ्रामक और हवाबाजी हैं।

सरकारी नियम और ADM Act के तहत हुआ था जमीन का बदलाव

प्राप्त प्रशासनिक दस्तावेजों और भूमि राजस्व विभाग के पत्रों के अनुसार, यह मामला मौजा- दक्षिण धदका (JL No. 27, Plot No. 264 /491) से जुड़ा हुआ है। कानूनी प्रक्रिया: पश्चिम बंगाल भूमि सुधार अधिनियम (WBLR Act, 1955) की धारा 50(1)f, 51A(4) तथा नियम 105 एवं 106 के तहत इस जमीन के वर्गीकरण (Classification) में बदलाव की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है। सरकारी रिकॉर्ड: दस्तावेजों (SDL&LRO) से स्पष्ट है कि प्रशासनिक व कानूनी स्तर पर सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच-पड़ताल के बाद ही जमीन का रिकॉर्ड अपडेट किया गया।एनएच हाईवे व मुआवजा: एनएच-2 (NH-2) चौड़ीकरण/अधिग्रहण के दौरान सरकार और संबंधित प्राधिकरण द्वारा कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन के मालिक मुआवजा (लाखों रुपये की राशि के चेक के माध्यम से) भुगतान किया गया था।

विधायक को दी गई गलत जानकारी और कानूनी कार्रवाई का दावा

घटना के दौरान जिस तरह से विधायक का इस मामले में प्रवेश हुआ और उन्होंने कानूनी कार्रवाई की बात कही, उसके पीछे स्थानीय स्तर पर फैलाई गई झूठी अफवाहें थीं। इलाके के कुछ लोगों ने अपनी मंशा साधने के लिए विधायक के समक्ष मनगढ़ंत कहानी गढ़ी और जमीन के वास्तविक स्वरूप को लेकर उन्हें गलतफहमी का शिकार बनाया। जबकि प्रशासनिक और जमीनी दस्तावेजों की पड़ताल करने पर सच्चाई बिल्कुल अलग साबित होगी। क्योंकि सरकारी दफ्तर में चेक कर बयान कर रही है इस जमीन की हकीकत। अब सवाल खड़ा होता है कि विधायक डीएम दफ्तर और लैंड अधिकारी से इस जमीन की कागजात का पुष्टि करेगी।

जमीन मालिक का पक्ष और ‘सच्चाई’

इस पूरे प्रकरण में जमीन मालिक सामने आया है कि वे जमीन को लेकर पैदा हुए विवाद और गलतफहमी के कारण हवाबाजी की गई है। जबकि ( SDLRO और BLRO दफ्तर में यह पुष्टि करती है इस जमीन की दस्तावेज) इस बात की गवाही देते हैं कि कागजी कार्रवाई पूरी तरह वैध रही है।

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