आसनसोल में वाहन लोन और आरटीओ सेटिंग का सनसनीखेज खेल: ए मेहता के काले कारनामों का पर्दाफाश

आसनसोल: आसनसोल में इन दिनों सड़कों पर गाड़ियां बहुत तेजी से दौड़ रही हैं, लेकिन इसके पीछे एक ऐसा काला खेल चल रहा है जो आम जनता की जेब पर सीधे डाका डाल रहा है। तृणमूल के शासनकाल में जिस तरह से ‘सेटिंग की राजनीति’ चलती रही है, उसी तर्ज पर आसनसोल के मुर्गासोल और उषा ग्राम के बीच सक्रिय एक मुख्य किरदार ‘ए मेहता’ (A Mehta) का नाम इन दिनों सबसे आगे आ रहा है। आरटीओ दफ्तर से लेकर विभिन्न शोरूम तक फैले इस नेटवर्क ने एक ऐसा जाल बिछा रखा है, जिसने ऑटोमोबाइल सेक्टर में भूचाल ला दिया है।

​क्या है लोन और पे-आउट का पूरा खेल?

​सामान्यतः ग्राहक जब लोन पर कोई वाहन खरीदते हैं, तो उन्हें लगता है कि वे केवल तय डाउन पेमेंट और लोन की किस्तों (EMI) का भुगतान कर रहे हैं। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली है। जानकारों के अनुसार, इस पूरी सेटिंग के मास्टरमाइंड ए मेहता हैं।

​जब इसकी तहकीकात की गई, तो ए मेहता का एक बहुत बड़ा राज सामने आया। लोन प्रक्रिया के दौरान ग्राहकों से चुपके से अतिरिक्त शुल्क वसूले जाते हैं, जिसका कोई आधिकारिक हिसाब या ऑडिट ट्रेल नहीं होता। शोरूम और डीलरशिप्स बैंक के साथ मिलकर ग्राहकों को लूट रहे हैं।

​ए मेहता का “2500 रुपये की अवैध वसूली का खेल”

​ए मेहता के अनुसार, जब ग्राहक लोन पर गाड़ी खरीदता है, तो शोरूम पहले ही बैंक से सांठगांठ कर लेता है कि लोन का 4% हिस्सा पे-आउट के रूप में शोरूम को मिलेगा। इसके अलावा, डिलीवरी ऑर्डर (DO) और केएफएस (KFS) स्टेटमेंट के नाम पर ग्राहकों से प्रति वाहन 2,500 रुपये से अधिक की राशि अवैध रूप से वसूली जाती है, जिसका कोई रसीदी हिसाब नहीं दिया जाता।

​कैसे होता है यह पूरा घोटाला?

​ए मेहता की इस पूरी कार्यप्रणाली के राज निम्नलिखित हैं:

  • ​डॉक्यूमेंटेशन और प्रोसेसिंग चार्ज: बैंक द्वारा लोन राशि में ही प्रोसेसिंग फीस, बीमा और अन्य चार्ज पहले ही जोड़ दिए जाते हैं।
  • ​चुनिंदा डीलर लोडिंग (DI): डिलीवरी ऑर्डर (DO) जारी होने के बाद, ‘चुटका’ या डायरी में एम-मनी (Margin Money) और शोरूम चार्ज के नाम पर अतिरिक्त 2,500 रुपये अलग से जोड़े जाते हैं।
  • ​बिल और स्टेटमेंट में भारी अंतर: कागजों पर कुल देय राशि और बैंक डिस्बर्समेंट में हेरफेर करके आम गरीब ग्राहकों को लूटा जा रहा है।

​प्राइवेट शोरूम से निकाले जाने का राज और वर्तमान ठिकाना

​सवाल यह भी उठता है कि आखिर उस प्राइवेट शोरूम से ए मेहता को क्यों निकाला गया था? इसके पीछे क्या राज था और उन्होंने उस शोरूम के अंदर कितने का खेल किया था कि उन्हें आखिरी वक्त में वहां से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया?

​आज यही ए मेहता आसनसोल के कल्याणपुर सैटेलाइट टाउनशिप में बैठकर इस पूरे खेल को अंजाम दे रहे हैं। आखिर आरटीओ दफ्तर से लेकर विभिन्न शोरूमों को किस तरीके से अपने जाल में फंसाकर और एक मकड़ी के जाले की तरह कार्य करके वह अपनी जेब गर्म कर रहे हैं, इसके तमाम राज अब आसनसोल समाचार की स्क्रीन पर आम जनता के सामने बेनकाब होने लगे हैं।

Leave a Comment

Traffic Tail