विभिन्न प्रकार की बाधाओं और अड़चनों को दरकिनार करते हुए आज नीमचा में एक जोरदार और सफल श्रमिक पीठ मीटिंग का आयोजन किया गया। 5 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस मीटिंग में सैकड़ों की संख्या में श्रमिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। कार्यक्रम में एचएमएस (HMS) के जनरल सेक्रेटरी श्री एस.के. पांडेय की विशेष उपस्थिति रही।
पारंपरिक राजनीति को तोड़कर बनाई मजबूत पहचान:
स्थानीय यूनिट के नेतृत्व में श्रमिक लंबे समय से संघर्षरत हैं। नीमचा की यह विशेषता रही है कि दशकों से यहां जिस पक्ष की सत्ता होती थी, उसी का यूनियन पर प्रभाव रहता था। हालांकि, इस पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए एचएमएस ने श्रमिकों के बीच अपनी एक मजबूत और स्वतंत्र पहचान बनाई है। पूर्व में गठित कमेटी को जबरन भंग किए जाने के बावजूद श्रमिकों का विश्वास एचएमएस पर अडिग रहा, जिसके परिणामस्वरूप एक मजबूत कमेटी का पुनर्गठन किया गया है।

प्रमुख वक्ताओं के विचार:
बैठक में मुख्य रूप से एचएमएस के जनरल सेक्रेटरी श्री एस.के. पांडेय, साबिर आलम (जनरल सेक्रेटरी), श्री निराला (ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी), सिंटू सर (ECL जनरल सेक्रेटरी), राजकुमार सिंह सहित कई अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे।

नीमचा यूनिट एचएमएस के प्रेसिडेंट एवं सीनियर ओवरमैन श्री रामाशीष प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि, “जब-जब मैनेजमेंट ने सत्ता की ताकत से श्रमिकों के हक को दबाने की कोशिश की है, तब-तब एस.के. पांडेय जी ने जोरदार लड़ाई लड़कर श्रमिकों को उनका हक दिलाया है। चाहे डिसमिस हुए श्रमिकों की पुनः ज्वाइनिंग का मामला हो या रातों-रात वेतन का भुगतान कराना, पांडेय जी हमेशा श्रमिकों के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे हैं।”

एस.के. पांडेय का कड़ा संदेश:
अपने संबोधन में एचएमएस के जनरल सेक्रेटरी श्री एस.के. पांडेय ने अपने 49 वर्ष 6 महीने के ट्रेड यूनियन सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी श्रमिकों के नुकसान वाली किसी नीति पर मैनेजमेंट से समझौता नहीं किया।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी, “कुछ लोग हमारी यूनियन का विरोध करने और मीटिंग रोकने के लिए पूरी ताकत लगा देते हैं। लेकिन हमारी यूनियन किसी सत्ता के सहारे नहीं, बल्कि श्रमिकों के सहारे चलती है। यदि हमारे किसी भी श्रमिक, सदस्य या प्रेसिडेंट को परेशान किया गया, तो मैं कानूनी कार्रवाई से लेकर हर स्तर पर मुकाबला करने से पीछे नहीं हटूंगा।” उन्होंने राजनीतिक प्रभाव से ऊपर उठकर सभी यूनियनों से श्रमिकों के हित में एकजुट होने की
अपील की।








