आसनसोल : नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत लच्छीपुर दिशा केंद्र के पास बिना किसी स्वीकृत नक्शे के नियमों को ताक पर रखकर खड़ी की जा रही अवैध इमारत पर आखिरकार निगम की ओर से आधिकारिक तौर पर ‘स्टॉप कंस्ट्रक्शन वर्क नोटिस’ (Stop Construction Work Notice) जारी कर दिया गया है। कागजी दस्तावेजों (मेमो नं: 513/Plg/Eng/2026, दिनांक 20.07.2026) के मुताबिक, वार्ड नंबर-59, शीतला मंदिर के पास बिना प्राधिकार के यह निर्माण धड़ल्ले से जारी था। अब इस अवैध ढांचे पर बुलडोजर चलने और डिमोलिशन (Demolition) होने का रास्ता साफ हो चुका है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम के भीतर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों की कलई खोलकर रख दी है!
आसनसोल नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत लच्छीपुर दिशा केंद्र के पास बिना किसी स्वीकृत नक्शे के नियमों को ताक पर रखकर खड़ी की जा रही अवैध इमारत पर आखिरकार निगम की ओर से आधिकारिक तौर पर ‘स्टॉप कंस्ट्रक्शन वर्क नोटिस’ (Stop Construction Work Notice) जारी कर दिया गया है। कागजी दस्तावेजों (मेमो नं: 513/Plg/Eng/2026, दिनांक 20.07.2026) के मुताबिक, वार्ड नंबर-59, शीतला मंदिर के पास बिना प्राधिकार के यह निर्माण धड़ल्ले से जारी था। अब इस अवैध ढांचे पर बुलडोजर चलने और डिमोलिशन (Demolition) होने का रास्ता साफ हो चुका है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम के भीतर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों की कलई खोलकर रख दी है!
500 मीटर की दूरी पर बोरो कार्यालय, फिर भी आंखें मूंदे क्यों रहे स्वपन घोष?
सवाल यह खड़ा होता है कि जिस बोरो कार्यालय (Borough VIII) से इस अवैध निर्माण स्थल की दूरी मात्र 500 मीटर है, और उस बोरो कार्यालय के इंचार्ज एवं जूनियर इंजीनियर अधिकारी स्वपन घोष (Swapna Ghosh) हैं, उन्होंने शुरुआती दौर में इस पर सख्त और उचित कार्रवाई क्यों नहीं की? जब साइट एन्क्वायरी (Site Enquiry) के लिए अधिकारी पहुंचे थे और तस्वीरें सब कुछ साफ बयां कर रही थीं, तब चेतावनी देने के बावजूद निर्माण कार्य रोकने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया?
संजना राय का कबूलनामा: “आमी 2 lakh diye chi…”
वायरल हो रहे सोशल मीडिया के स्क्रीनशॉट और टिप्पणियों में खुद संजना राय का यह सनसनीखेज कबूलनामा सामने आ रहा है कि— “आमी 2 lakh diye chi tpore Ami ghor kote pare chi” (यानी मैंने 2 लाख रुपये दिए हैं, तभी घर बना पा रही हूं)। क्या इतनी मोटी रिश्वत खाकर ही इंजीनियर स्वपन घोष ने इस अवैध इमारत को खड़ा होने का पूरा संरक्षण दिया था?
‘आसनसोल समाचार’ के फोन करते ही क्यों कांपे स्वपन घोष?
जब ‘आसनसोल समाचार’ के प्रतिनिधियों ने इस गंभीर मामले पर आरोपी इंजीनियर स्वपन घोष से फोन पर संपर्क साधा और उनसे जवाब मांगा, तो उन्होंने सवालों का सामना करने के बजाय भयभीत होकर तुरंत फोन काट दिया। उनकी यह घबराहट, लड़खड़ाती आवाज और बातचीत से भागना इस बात का पुख्ता सबूत है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है!
गंभीर सवाल जो जनता के बीच गूंज रहे हैं:
बोरो कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर चल रहे इस अवैध निर्माण की भनक इंचार्ज स्वपन घोष को क्यों नहीं लगी?
जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों (जैसे सुरेन्द्र अधिकारी और अग्निमित्र पाल) ने खुले तौर पर अवैध निर्माणों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, तब निगम के इन अधिकारियों ने कान में तेल क्यों डालकर रखा था?
आसनसोल समाचार के फोन उठाते ही स्वपन घोष क्यों डर गए और उन्होंने फोन क्यों काट दिया?
मांग: उच्च स्तरीय जांच कमेटी बैठे और हो निष्पक्ष कार्रवाई!
अब जबकि निगम ने नोटिस जारी कर दिया है, तो यह देखना लाजिमी है कि प्रशासन इस पर अंतिम हथौड़ा कब चलाता है। लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि इस भ्रष्टाचार के मुख्य खिलाड़ी स्वपन घोष के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कमेटी (Enquiry Committee) बैठाकर यह क्यों न जांच की जाए कि उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐसे कितने अवैध निर्माणों को बढ़ावा देकर अकूत संपत्ति बनाई है? आसनसोल समाचार इस भ्रष्टाचार के खिलाफ तब तक आवाज उठाता रहेगा जब तक दोषियों को उनके अंजाम तक नहीं पहुँचाया जाता!

500 मीटर की दूरी पर बोरो कार्यालय, फिर भी आंखें मूंदे क्यों रहे स्वपन घोष?
सवाल यह खड़ा होता है कि जिस बोरो कार्यालय (Borough VIII) से इस अवैध निर्माण स्थल की दूरी मात्र 500 मीटर है, और उस बोरो कार्यालय के इंचार्ज एवं जूनियर इंजीनियर अधिकारी स्वपन घोष (Swapna Ghosh) हैं, उन्होंने शुरुआती दौर में इस पर सख्त और उचित कार्रवाई क्यों नहीं की? जब साइट एन्क्वायरी (Site Enquiry) के लिए अधिकारी पहुंचे थे और तस्वीरें सब कुछ साफ बयां कर रही थीं, तब चेतावनी देने के बावजूद निर्माण कार्य रोकने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया?

संजना राय का कबूलनामा: “आमी 2 lakh diye chi…”
वायरल हो रहे सोशल मीडिया के स्क्रीनशॉट और टिप्पणियों में खुद संजना राय का यह सनसनीखेज कबूलनामा सामने आ रहा है कि— “आमी 2 lakh diye chi tpore Ami ghor kote pare chi” (यानी मैंने 2 लाख रुपये दिए हैं, तभी घर बना पा रही हूं)। क्या इतनी मोटी रिश्वत खाकर ही इंजीनियर स्वपन घोष ने इस अवैध इमारत को खड़ा होने का पूरा संरक्षण दिया था?

‘आसनसोल समाचार’ के फोन करते ही क्यों कांपे स्वपन घोष?
जब ‘आसनसोल समाचार’ के प्रतिनिधियों ने इस गंभीर मामले पर आरोपी इंजीनियर स्वपन घोष से फोन पर संपर्क साधा और उनसे जवाब मांगा, तो उन्होंने सवालों का सामना करने के बजाय भयभीत होकर तुरंत फोन काट दिया। उनकी यह घबराहट, लड़खड़ाती आवाज और बातचीत से भागना इस बात का पुख्ता सबूत है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है!

गंभीर सवाल जो जनता के बीच गूंज रहे हैं:
- बोरो कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर चल रहे इस अवैध निर्माण की भनक इंचार्ज स्वपन घोष को क्यों नहीं लगी?
- जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों (जैसे सुरेन्द्र अधिकारी और अग्निमित्र पाल) ने खुले तौर पर अवैध निर्माणों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, तब निगम के इन अधिकारियों ने कान में तेल क्यों डालकर रखा था?
- आसनसोल समाचार के फोन उठाते ही स्वपन घोष क्यों डर गए और उन्होंने फोन क्यों काट दिया?

मांग: उच्च स्तरीय जांच कमेटी बैठे और हो निष्पक्ष कार्रवाई!
अब जबकि निगम ने नोटिस जारी कर दिया है, तो यह देखना लाजिमी है कि प्रशासन इस पर अंतिम हथौड़ा कब चलाता है। लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि इस भ्रष्टाचार के मुख्य खिलाड़ी स्वपन घोष के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कमेटी (Enquiry Committee) बैठाकर यह क्यों न जांच की जाए कि उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐसे कितने अवैध निर्माणों को बढ़ावा देकर अकूत संपत्ति बनाई है? आसनसोल समाचार इस भ्रष्टाचार के खिलाफ तब तक आवाज उठाता रहेगा जब तक दोषियों को उनके अंजाम तक नहीं पहुँचाया जाता!








