आसनसोल में सेहत से खिलवाड़: छापेमारी में खुली पोल, सड़े चिकन की बिरयानी और सिंथेटिक दूध से बन रही थीं मिठाइया

आसनसोल : शहर के बाजारों में मिलावट और घटिया खान-पान का काला कारोबार किस हद तक फैल चुका है, इसका खुलासा हाल ही में हुई प्रशासनिक छापों के बाद सामने आया है। गली-मोहल्लों और चौराहों पर धड़ल्ले से चल रही दुकानों में लोगों की सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।

स्थानीय बाजारों में हाल ही में हुई छापेमारी के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, वे हैरान करने वाली थीं। कई जगहों पर होटलों और दुकानों की जांच में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद कथित तौर पर भारी मात्रा में घटिया और बासी बिरयानी को नालियों में बहाना पड़ा। वहीं, जब मिठाई की दुकानों पर प्रशासनिक गाज गिरी, तो वहां भी मिलावट का भंडाफोड़ हुआ।

सूत्रों के मुताबिक, आसनसोल में इन दिनों असली दूध के बजाय पैकेट वाले ‘मधुसूदन’ दूध और विभिन्न केमिकल के सहारे सिंथेटिक दूध तैयार किया जा रहा है। इसी नकली दूध से पनीर, मलाई और अन्य मिठाइयां बनाकर बाजार में बेची जा रही हैं, जिन्हें खाकर आम लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

दूसरी ओर, बिरयानी के नाम पर भी जहर परोसा जा रहा है। महज नब्बे रुपये में मिलने वाली सस्ती बिरयानी के नाम पर ग्राहकों को ठगा जा रहा है। आरोप है कि कई जगहों पर मृत और बेहद कम भाव के खराब चिकन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे तरह-तरह के हानिकारक केमिकल्स और घटिया चावल के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। अपनी जेब गर्म करने के चक्कर में ये दुकानदार ग्राहकों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। गली-मोहल्लों में जिस तरह से बिना मानकों के ऐसी दुकानें खुली हुई हैं, उसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि अब ये खाने-पीने की दुकानें नहीं बल्कि ‘बीमारियों की दुकान’ बन चुकी हैं।

इस पूरे गोरखधंधे के पीछे स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और सुस्त रवैये को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। लोगों का सवाल है कि सत्ता परिवर्तन या प्रशासनिक फेरबदल के बाद भी क्या हालात ऐसे ही बने रहेंगे या फिर इन अवैध और मिलावटी कारोबारियों पर लगातार सख्त कार्रवाई का चाबुक चलता रहेगा? यदि इस तरह की औचक जांच का सिलसिला आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रखा जाए, तो शहर में बिकने वाले इस जहर के कारोबार पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है।

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